जैविक प्रमाणीकरण

यह प्राथमिक उत्पादकों के लिए होता है जिसमें ऑर्गेनिक उत्पादनों को उत्पादित करने वाले अर्थात् किसान सम्मिलित होता है। एजेन्सियाँ प्रमाणीकरण प्राप्त करने के लिए न्यूनतम अवधि निर्धारित करती हैं जैसे एस.जी.एस. में 12 से 36 महीने तक का समय ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट देने के लिए निर्धारित है।

प्रथम चरण में, प्रमाणीकरण के लिए आवेदन किया जाता है। प्रत्येक एजेन्सी के पास प्रमाणीकरण के लिए निर्धारित फाॅरमेट होता है जिसमें स्टेण्डर्ड एप्लीकेशन फार्म के साथ नियम एवं शर्ताें की विस्तृत जानकारी होती है। कई स्थितियों में प्रमाणीकरण की विभिन्न अवस्थाओं की पूरी जानकारी तथा उसमें लगने वाले मूल्य को प्रमाणीकरण के प्रस्ताव के साथ आवेदक को भेजा जाता है।

एप्लीकेशन फार्म मिलने पर, आवेदक द्वारा प्रारम्भिक जानकारी के लिए आवश्यक सूचना प्रमाणीकरण एजेन्सी को भेजी जाती है, इसमें निम्नलिखित सम्मिलित हो सकते हैं –

  • फार्म का नक्शा
  • फार्म पर की जाने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी
  • प्रबंध योजना
  • मृदा परीक्षण रिपोर्ट
  • एफीडेविट जो अंतिम बार उपयोग में लिए गए निषेधित इनपुट की घोषणा करता है।

जब प्रमाणीकरण एजेन्सी द्वारा आवश्यक जानकारी इकट्ठी कर ली जाती है, तब आवेदन अधिकारिक रूप से प्रमाणीकरण के लिए पंजीकृत हो सकता है। पंजीकृत होने के तुरंत बाद, प्रमाणीकरण एजेन्सी द्वारा पहला ऑडिट-रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस ऑडिट में यदि सभी चीजें आवश्यकतानुसार हो रही होती हैं तो पंजीकरण की पुष्टि हो जाती है। रूपान्तरण अवधि निरीक्षण के दिन से शुरू हो जाती है।

निरीक्षण भ्रमण के दौरान, निरीक्षक द्वारा की जाने वाली क्रियाएँ

  • प्रमाणीकरण के अन्तर्गत उत्पाद के उत्पादन के लिए की जाने वाली प्रक्टिसेज, विधियों तथा इनसे संबंधित मानकों पर ऑपरेटर के साथ विचार-विमर्श करना।
  • उत्पादन प्रक्रिया में लगे श्रमिकों तथा अन्य कर्मचारियों के साथ विचार करना।
  • ऑपरेटर के द्वारा बनाए गए रिकाॅर्डों का पुनरावलोकन करना और इसके सुधार के लिए उपाय करना जो कि पहले दिए गए सुझावों पर आधारित होते हैं।
  • उत्पादन के क्षेत्र या फार्म का भ्रमण करना और जैविक तथा गैर-जैविक के लिए प्रेषण बनाना। इसके अलावा ऑफिस, गोदाम तथा प्रोसेसिंग यूनिट आदि का भी भ्रमण किया जाता है।
  • पास के क्षेत्रों के दूसरे किसानों या ऊपर दी गई जानकारी की जांच के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के साथ विचार-विमर्श करना।
  • उत्पादन प्रक्रिया में काम आने वाली सामग्री के नमूने इकट्ठा करना। नमूने बेतरतीब विभिन्न स्थानों से इकट्ठा कर, मिलाकर लिए जाते हैं।
  • ऑपरेटर के द्वारा सामना की जा रही परेशानियों का पता लगाना तथा उसके निवारण के सुझाव देना।
  • नमूने के तीन सेट बनाकर उन्हें सील करना तथा इन नमूनों पर माॅनिटर या व्यक्ति जो फार्म का भ्रमण करते हैं, ऑपरेटर और दूसरे किसी जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर करवाना। इसमें नमूना ऑपरेटर के पास रहता है तथा शेष नमूने के आगे के परीक्षण के लिए क्षेत्रीय समन्वयक या मुख्य कार्यालय को भेजे जाते हैं।

रिपोर्ट तैयार करना

निरीक्षण समाप्त होने के बाद माॅनिटरों या व्यक्तियों जो खेत का भ्रमण करके रिपोर्ट तैयार करते हैं तथा उस पर हस्ताक्षर करते हैं। इस रिपोर्ट की एक काॅपी ऑपरेटर के पास रहती है। इसमें ऑपरेटर को होने वाली परेशानियाँ तथा उनके निवारण के सुझावों को भी शामिल किया जाता है। इसमें ऐसी परेशानियों का भी उल्लेख होता है जिसके हल के लिए सुझावों को जानने की आवश्यकता होती है। अन्त में ऑपरेटर को अगले भ्रमण के लिए दिनांक दी जाती है।

विशेष प्रावाधित माॅनिटरिंग

निरीक्षक के द्वारा सर्वेलन्स ऑडिट भी किया जाता है जो कि अघोषित निरीक्षण भ्रमण के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के भ्रमण के दौरान इमीजिएट पोस्ट में होने वाली क्रियाओं या भ्रमण के दौरान होने वाली गतिविधियों की जांच की जाती है। यह जांच, रूपान्तरण योजना तथा ऑपरेटर व प्रमाणीकरण एजेंसी के बीच सहमति वाले मानकों के अनुसार होती है। इस तरह के प्रत्येक भ्रमण के रिकार्ड बनाए जाते हैं और ये रिकार्ड प्रमाणीकरण एजेन्सियों के उच्च अधिकारियों के द्वारा निरीक्षित किये जाते हैं। इसमंे निषेधित तत्वों तथा सामग्री के उपयोग की जांच के लिए भी नमूनों का परीक्षण भी किया जाता है।

कुछ स्थितियों में, ऑपरेटर द्वारा फार्म पर ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण ऐसी ”पूर्ण रूपांतरण सर्टिफिकेट” जारी कर सकती है और कुछ परिस्थितियों में ”जैविक में रूपांतरण” के लिए सर्टिफिकेट जारी किये जाते हैं।

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